सोमवार, 8 जून 2015

    [१]
      छन्नूजी 
दाल भात रोटी मिलती तो.
छन्नू नाक चढ़ाते|
पुड़ी परांठे रोज रोज ही.
मम्मी से बनवाते|

हुआ दर्द जब पेट, रात को.
तड़फ तड़फ चिल्लाये|
बड़े डाक्टर ने इंजॆक्शन‌
आकर चार लगाये|

छन्नूजी अब दाल भात या.
रोटी ही खाते हैं|
पुड़ी परांठे.दिए  किसी ने
गुस्सा हो  जाते हैं|

        [२]
     हिन्दी भाषा का रुतवा |
  जब गुड़िया कापी में लिखती ,
  क, ख, ग, घ, च, छ ,ज |
  हंसकर सबको बतलाती है ,
  हिन्दी भाषा का रुतवा |

   मजबूरी में जब अंग्रेजी ,
  में ए. बी .सी .डी लिखती |
  हारी हारी थकी थकी सी ,
  सूखे पत्ते सी दिखती |

  गुस्से में कहती है मुझको ,
  हिन्दुस्तानी  पढ़ना है |
  अंग्रेजी भाषा से मुझको ,
  अभी नहीं माँ जुड़ना है |


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें